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भदरसा के जलने में प्रशासन की अहम भूमिका: रिहाई मंच

November 9, 2012

This release in Hindi about recent communal violence in the Bhadarsa area of Faizabad district of Uttar Pradesh comes to us from the RIHAI MANCH. Please help us translate this into English by translating just one paragraph in the comments

Jannatunisa

फैजाबाद, 9 नवम्बर 2012। रिहाई मंच के जांचदल ने दशहरा के दौरान हुयी साम्प्रदायिक हिंसा से प्रभावित भदरसा गांव का दौरा किया। जांच दल ने पाया कि भदरसा में हुयी हिंसा पूरी तरह सुनियोजित थी जिसे साम्प्रदायिक तत्वों और प्रशासन की मिलीभगत से अंजाम दिया गया जिसमें मीडिया की भूमिका भी संदिग्ध थी। जांच दल ने यह भी पाया कि प्रशासन की तरफ से आगजनी से पीडित परिवारों से घटना के साक्ष्य जबरन मिटवाए जा रहे हैं जबकि पीडि़तों को न तो उचित मुआवजा मिला है और ना ही एफआईआर दर्ज किये गये हैं। जांच दल ने प्रेस काउंसिल द्वारा गठित शीतला सिंह जांच आयोग से भी भदरसा जाने की मांग की है।

रिहाई मंच ने भदरसा के अपने दौरे में पाया कि 24 और 26 अक्टूबर की देर शाम को हजारों की संख्या में दंगाईयों ने भदरसा स्थित मुस्लिम कस्बे को चारों ओर से घेर लिया और उत्तेजक नारों के साथ हमला करते हुए आगजनी और लूटपाट की घटनाओं को अंजाम दिया। जिसमें सौ से अधिक जले घरों की पुष्टि हुयी है। हमला इस कदर प्रायोजित था कि दंगाई मुस्लिमों की बस्ती को जलाने के लिये पेट्रोल बम भी साथ ले कर के आए थे। जांच दल को स्थानीय निवासियों ने दबी जुबान में बताया कि दंगे से पूर्व अधिकारियों और पुलिस वालों ने भदरसा के चारों कोटेदारों से भारी मात्रा में केरोसिन तेल थाने पहंुचाने का आदेश दिया। उधर स्थानीय मीडिया विनय कटियार जैसे नेताओं के हवाले से यह खबर प्रचारित कर रही थी कि प्रत्येक मुसलमान के घर पांच-पांच लीटर तेल बांटे गये। जिस कहानी को पुलिस भी मानती दिखाई देते हुये सिर्फ मुसलमानों को गिरफ्तार कर रही है। अब सवाल खड़ा होता है कि मुसलमान दंगों में शामिल थे तो बडे पैमाने पर सिर्फ उन्हीं के घर क्यों जले। जांच दल ने पाया कि मुस्लिमों के घरों को पूरी तरह जलाने के लिये उनके बिस्तरों और कपड़ों का भी इस्तेमाल किया, जिसकी मौके पर जाकर शिनाख्त की गयी। जांच दल ने यह भी पाया कि इस पूरी घटना के दौरान पीएसी आतताईयों के पक्ष में मूक दर्शक बनी रही। घटना के बाद जब पीडि़त परिवारों ने प्रार्थमिकी देने की कोशिश की तो उन्हें भगा दिया गया और कहा गया कि प्राथर््मिकी तभी दर्ज होगी जब इसमें से प्रशासन के उपर लगाए आरोपों को हटा लिया जाएगा।

उधर जांच दल ने पाया कि पूरी तरह से जल चुके मुस्लिम घरों वाले इस मुहल्ले में आगजनी और हमलों के साक्ष्यों को मिटाने के लिये प्रशासनिक अमले के इशारे पर फत्तेपुर के ग्राम प्रधान पतिराम ने पुलिस के सहयोग से जबरिया मलवे को हटावाने के लिये लोगों पर दबाव डाला। जांच दल ने यह भी पाया कि स्थानीय लेखपाल राजेश कुमार सिंह ने मुआवजा निर्धारण करने की प्रक्रिया में भारी अनियमितता बरती है। इस हिंसा में जिन लोगों की कई लाख रूपये का नुकसान हुआ उन्हें चंद हजार रूपये बतौर राहत दिया गया। साथ ही जो गरीब, विधवा और पूरी तरह निराश्रित थे उन्हें मुआवजे के योग्य ही नहीं समझा गया। लेखपाल ने साम्प्रदायिक पूर्वाग्रह से ग्रसित हो कर मुआवजे से वंचित रह गये लोगों से यह भी कहा कि आप को अपने जान-माल की सुरक्षा स्वयं करनी चाहिए थी। जांच दल ने पाया कि फैजाबाद के तर्ज पर ही भदरसा में भी राहत और बचाव दल को तय समय पर पहंुचने से रोकने की सचेत कोशिश के तहत फायर ब्रिगेड, पुलिस की जीप और परिवहन विभाग के एक बस को फंूक दिया गया। साजिश का पता इस बात से भी चलता है कि अव्वल तो फायर ब्रिगेड पहंुचे ही नहीं और पहंुचे भी तो उनके पास पानी ही नहीं था। अर्ध सैन्य बल और पुलिस के आला अधिकारियों का भदरसा मौके पर न पहंुचना भी प्रशासनिक भूमिका को संदिग्ध बनाती है। जबकि भदरसा फैजाबाद मुख्यालय से मात्र 17 किलामीटर दूरी पर स्थित है। जांच दल ने यह भी सवाल उठाया कि 24 अक्टूबर के साम्प्रदायिक हिंसा के बाद 25 अक्टूबर को तो शांति बनी रही लेकिन फिर 26 तारीख को और भी बडे पैमाने पर हिंसा कैसे हो गयी। जबकि 24 की हिंसा के बाद ही उसे मुस्तैद हो जाना चाहिये था।

जांच बल ने पाया कि भदरसा के पूर्व चेयरमैन और भाजपा नेता रामबोध सोनी, भोला मास्टर, व्यापार मंडल के अध्यक्ष दयालू, विरेंद्र हलवायी, जगदम्बा प्रसाद, सुरेंद्र मौर्या, नयिकापुर के प्रधान गोपीनाथ उर्फ गुप्पी, प्रधान बाबूलाल यादव और उनके दो लड़कों के साथ केशवपुर, राजेपुर, बनईयापुर, केवटहिया, निमोलिया, लालपुर आदि गांव के हजारों लोग इस सुनियोजित दंगे में शामिल रहे। पुलिस की साम्प्रदायिक कार्यप्रणाली को समझने के लिये अभियुक्त बनाए गये पचहत्तर वर्षीय हाजी इफ्तेखार के उपर दर्ज हत्या का आरोप ही काफी होगा। वे लकवाग्रस्त हैं और उनके अंग भी ठीक से काम नहीं कर पाते हैं। जिन बीड़़़़़़ी मजदूरों के घर साम्प्रदायिक हिंसा की भेंट चढ गये पुलिस ने उन्हीं लोगों को बंदूकों के बट से पीटा, महिलाओं के साथ अभद्रता की और उन्हीं के घरों के बच्चों को गिरफ्तार करके भी ले गयी। यहां तक कि आकिब जैसे चैदह साल के नाबालिग बच्चे को भी पुलिस ने नहीं छोडा और दंगाई बता कर जेल में डाल दिया।

रिहाई मंच ने अपनी जांच में मिले तथ्यों के आधार पर प्रेस काउंसिल आॅफ इंडिया द्वारा गठित शीतला सिंह जांच आयोग से मांग की है कि भदरसा के मुद्दे पर स्थानीय मीडिया द्वारा एक पखवाडे तक भ्रम की स्थिति बनाए रखने वाली रिर्पोटिंग पर कार्यवायी करे। और स्वयं प्रभावित इलाके का दौरा करे क्योंकि वहां इस कदर दहशत व्याप्त है कि लोग अभी भी अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। रिहाई मंच ने आरोप लगाया कि साम्प्रदायिक हिंसा में बडे पैमाने पर शामिल रहने के बावजूद हिंदु अभियुक्तों के नाम अखबारों में नहीं प्रकाशित किये जा रहे हैं। जबकि चंद मुस्लिम अभियुक्तों के नाम बार-बार छाप कर के मुसलमानों के खिलाफ माहौल बनाने में मीडिया लगी है।

जांच दल में संजरपुर, आजमगढ़ से आए मसीहुद्दीन संजरी, गुलाम रसूल, सर्फुद्ीन, मोहम्मद हारून, राजीव यादव, अनुज शुक्ला, शाहआलम, आफाक अहमद और शाहनवाज आलम शामिल थे।

द्वारा जारी
राजीव यादव, शाहनवाज आलम

11 Comments leave one →
  1. November 9, 2012 9:52 PM

    Para 1:

    Faizabad 9 December 2012: An investigation team of Rihai Manch visited the Badarsa village which was affected by communal violence during Dussehra celebrations. The team found out that the violence was well planned and was executed by the communal elements in connivance with the administration. The role of media in this incident is also ambigious. The team also found that the adminstration is forcing the affected families to erase any evidences of the incident and they have not even been compensated. No FIR has yet been registered yet. The team has also requested the Sheetla Singh Investigation Commission (constituted by Press Council) to visit the area.

  2. Ibn Mairaj permalink
    November 9, 2012 9:55 PM

    Para 1:

    Faizabad 9 December 2012: An investigation team of Rihai Manch visited the Badarsa village which was affected by communal violence during Dussehra celebrations. The team found out that the violence was well planned and was executed by the communal elements in connivance with the administration. The role of media in this incident is also ambigious. The team also found that the adminstration is forcing the affected families to erase any evidences of the incident and they have not even been compensated. No FIR has yet been registered yet. The team has also impressed upon the Sheetla Singh Investigation Commission (constituted by Press Council) to visit the area.

  3. Mukul Dube permalink
    November 9, 2012 10:07 PM

    Faizabad, 9 November 2012. The investigation team of the Rihai Manch toured Bhadarsa village, which was affected by the communal violence during Dashehra. The team found that the violence had been well organised and that communal elements and the administration had together been responsible for it. It found also that the media had played a malign role. The people affected had not received adequate compensation and had not been permitted to file FIRs. The team demanded that the Sheetla Singh Commission (spelling?), formed by the Press Council, go to Bhadarsa.

  4. Nivedita Menon permalink*
    November 10, 2012 11:01 AM

    FRIENDS, PLEASE TRANSLATE EACH PARAGRAPH IN SEQUENCE, NOT THE SAME ONE OVER AND OVER :)
    (If the font is unreadable, just increase the font size.)

    THE TITLE OF THE POST IS:
    Administration has prominent role in the burning of Bhadarsa: Rihai Manch

    Para 2
    Rihai Manch learnt during its visit that on 24th and 26th October, late in the evening, thousands of rioters surrounded the Muslim settlement in Bhadarsa, shouting provocative slogans, and carried out acts of loot and arson. The burning of more than a hundred burnt houses has been verified. The attack was so well-planned in advance, that the rioters had carried petrol bombs to set fire to Muslim homes. The fact-finding team was informed by local residents in hushed whispers that prior to the riots, officials and the police had ordered the four ration-shop owners of Bhadarsa to deliver kerosene in large quantities to the police station. Meanwhile, local media was publicizing the claim of leaders like Vinay Katiyar that five litres of kerosene had been distributed to each Muslim home. That the police are treating this claim as fact, is evident from their arresting only Muslims so far. The question that arises is that if in fact large numbers of Muslims were active in the riots, why is it only Muslim houses that have been burnt. The fact-finding team verified from the actual sites, that in order to ensure the complete burning of Muslim houses, their mattresses and clothes were also used to stoke the flames, The fact-finding team found that during the entire event, the PAC remained silent spectators, mutely aiding the rioters by their inaction. After the event, when the victims of the violence tried to file FIR’s, they were driven away, and informed that FIR’s would be filed only if the accusations against the administration were removed from them.

  5. November 10, 2012 6:02 PM

    can someone do the rest as well?

    • November 10, 2012 8:12 PM

      Para 3

      The investigation team discovered that on the cue of the local administration, Patiram, the village head of Fatehpur, pressured the nearby people to remove the evidences of attacks, arsoning and debris of the houses of Muslims which were completely torched, The RIHAI tean also found that Rajesh Kumar, the local Lekhpal, was involved in the gross irregularities in the process of determining compensation for the victims. People who lost properties worth lakhs in the violence were cruelly given meager financial reliefs of only a few thousand rupees. If that was not the worse, the poor, the widow and the homeless victims were not even considered for any compensation. Extending his coldness to the victims of the communal violence, the Lekhpal also went on to add that they should have had taken better care of their properties to avoid such loss. Just like Faizabad, the Relief team were deliberately discouraged from reaching the spot on time by the torching of the Fire Brigade team, a Police jeep and a bus of the State Transport Department; found the investigation team. What confirms the violence as a conspiracy is the fact that the best Fire Brigade teams didn’t reach the spot of the violence at the first place and those which made it, surprisingly didn’t have water! Further, the failure on the part of the para military forces and top police officials to reach Bhadarsa on time also put the role of the administration under grave suspicion; especially when Bhadarsa is only 17 kms away from the Faizabad police headquarters. The investigation team also raised the question that how come the violence suddenly increased magnanimously on 26 October when there was a day’s peace after 24 October’s violence and the state machinery had ample amount of time to recollect and alert itself?

      • November 10, 2012 8:57 PM

        4rth Para

        The RIHAI team found the following people involved in the targeted-communal violence against Muslims: Rambodh Soni (Former Chirman, Bhadarsa and BJP politician), Bhola Master, Dayalu (President, Vyapar Mandal), Virendra Halwayi, Jagdamba Prasad, Surendra Maurya, Gopinath aka Guppi (Gram Pradhan, Naikapur), Babula Yadav (Gram Pradhan), with his two sons and thousands of people hailing from Keshavpur, Rajepur, Banaiyapur, Kewhatia, Nimolia, Lalpur etc. The cruel fine of Rs. 75,000 on the 75 year old Haji Iftekhar, accused by the police on murder charges, is enough to fathom the depth of the communal modus-operandi of the police department. The accused, by the way, suffers with paralysis and can’t even do his daily chores. Moreover, the workers and labourers, whose own houses were put to fire in the violence, were brutally thrashed by the police with the butt of their rifles. Not only the female victims were subjected to the indecency of the police, their sons were also illegally detained by the police. Even Aquib, a 14 yr old guy was not spared who the police forcibly arrested and took away with them.

  6. Faiz permalink
    November 11, 2012 5:22 AM

    Based on the facts, Rihaai Manch has demanded that the Sheetla Singh Commission, formed by the Press Council of India, takes action against the local media for their inaccurate/biased reportage during the fortnight following the violence. It also demanded that the commission visits the affected areas to assuage the fears of the people who are still finding it difficult to get of of their homes. Rihaai Manch alleged that the names of the Hindu accused involved in communal violence are not being published in the newspapers. While names of a few Muslim accused are being published repeatedly by the media to create an environment of hostility against the community.

    The investigative team comprised of – from Sanjarpur, Azamgarh Maseehuddin Sanjari, Ghulam Rasool, Sharfuddin, Muhammad Haroon, Rajeev Yadav, Anuj Shukla, Shahalam, Afaq Ahmed and Shahnawaz Alam.

    Released by
    Rajeev Yadav and Shahnawaz Alam

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  2. The Uttar Pradesh administration has a prominent role in the burning of Bhadarsa: Rihai Manch « Kafila

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